CJI यानी भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचे एक याचिकाकर्ता को संसद जाने की सलाह दे दी। गुरुद्वारा से जुड़ी याचिका को लेकर उन्होंने कहा कि इस संबंध में वह संसद की समिति से संपर्क करें। साथ ही उन्होंने सतर्क होकर कहा कि अगर वह इस संबंध में कोई फैसला लेंगे, तो धर्म के मामले में दखल को लेकर आपत्ति उठ सकती है।
क्या था मामला
शीर्ष न्यायालय में गुरुद्वारा समितियों में फंड्स के दुरुपयोग से जुड़ी याचिका दाखिल हुई थी। इसे पेश करने वाले एक बुजुर्ग याचिकाकर्ता ने अदालत से सुनवाई का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, 'मैं आपके सामने माथा टेक रहा हूं। मेरी याचिका पर नोटिस कर दीजिए।
इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकार्ता को बताया कि इसके लिए कानून में संशोधन की जरूरत होगी। याचिका देखकर उन्होंने कहा, 'कोर्ट आपके लिए ही है। जब मर्जी आइए। लेकिन यह कानून में संशोधन लाना होगा। उसके लिए संसद के पास जाना है। आप संसद में याचिका समिति के पास जाइए। हम करेंगे, तो लगेगा कि धर्म के मामले में दखल दे रहे हैं।
टेट्रा पैक और पाउच जैसी पैकेजिंग में शराब से पूछा सवाल
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टेट्रा पैक और पाउच जैसी पैकेजिंग में शराब से जुड़ी याचिका पर सरकार से सवाल किया है। याचिका में इस तरह की पैकेजिंग में बिक्री पर रोग लगाने का अनुरोध किया गया था। इसपर सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने 'कम्युनिटी एगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग' नामक संगठन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता विपिन नायर ने कहा कि आबकारी व्यवस्था के तहत बोतल की परिभाषा 'अस्पष्ट' है और इस संबंध में कुछ मानक तय किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'वे फलों के जूस और शराब को लेकर भ्रम पैदा कर रहे हैं। पैक पर सेब की तस्वीर होती है, लेकिन उसके अंदर वोडका होती है।' उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करना सरकार का दायित्व है।
याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होने वाली एक नीति बनाए और टेट्रा पैक तथा पाउच जैसी पैकेजिंग में शराब की बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाए।
याचिका में क्या है मांग
याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि केंद्र सरकार राज्यों को उनके संबंधित आबकारी कानूनों, नियमों और नीतियों में संशोधन करने के लिए नीति तैयार करे, ताकि 'बोतल' की एक समान परिभाषा अपनाई जा सके, जिसे केवल कांच की बोतलों या अन्य पारदर्शी कंटेनरों तक सीमित रखा जाए।
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